अमेरिका में भारतीय धार्मिक परंपराओं पर एक अनोखी फोटो प्रदर्शनी अमेरिकन सेंटर में आज से शुरू

18 से 31 मई तक चलने वाली ‘‘कीपिंग फेथः इंडियन रिलीजियस ट्रेडीशंस इन द यूनाइटेड स्टेट्स,’’ नामक इस प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया गया है कि अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी किस प्रकार अपनी धार्मिक आस्था व परंपराओं का पालन करते हैं, इसके साथ-साथ अमेरिकियों ने किस प्रकार भारतीय आस्था और परंपराओं को अपनाया है।

प्रदर्शनी का उद्घाटन अमेरिकी दूतावास की प्रभारी राजदूत मैरीके कार्लसन; इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस (आईसीसीआर) के निदेशक, अमरेंद्र खतुआ; और इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर के अध्यक्ष सिराजुद्दीन कुरेशी करेंगे।

प्रदर्शनी भारतीय-अमेरिकी प्रवासियों की महान धार्मिक विविधता, और अमेरिकी संस्कृति पर पड़ने वाले प्रभाव को प्रदर्शित करती है। यह प्रदर्शनी प्रवासी समुदाय के द्वारा भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती रणनीतिक भागीदारी को रेखांकित करती है।

प्रदर्शनी को अमेरिकी दूतावास ने मेरिडियन इंटरनेशनल सेंटर और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्लूरिज्म प्रोजेक्ट के साथ प्रस्तुत किया है। चित्रों का संकलन रेखांकित करता है कि कैसे भारतीय आस्थाएं अमेरिका में फली-फूली, किस प्रकार लोग, समुदाय, और संगठन अपनी परंपराओं का पालन करते हैं तथा विविधताओं का आनंद लेते हैं।

भारत की तरह, अमेरिका एक मिश्रित बहुधार्मिक लोकतंत्र है। कीपिंग फेथ दर्शाता है कि विविधता का अर्थ क्या है। हम देखते हैं कि हार्वर्ड विश्वविद्यालय के छात्र परिसर में 1998 से होली खेलते हैं। टेक्सास में 2015 में हमें पता चला कि ग्रेटर ह्यूस्टन की भारतीय-अमेरिकी मुस्लिम एसोसिएशन ने इंटरनेशनल योग दिवस के रमजान के दौरान पड़ने के बावजूद उसमें भाग लिया तथा प्रायोजित किया। वर्मोंट से लेकर न्यू मैक्सिको तक अमेरिकियों ने भारतीय संस्कृति को अपनाया तथा स्वागत किया है, और कीपिंग फेथ दर्शाता है कि अमेरिका में यह कितना महत्वपूर्ण है।

कीपिंग फेथ के आयोजकों ने अमेरिका भर में समुदायों से अपने लोगों के उत्साह और भावना को दर्शाने वाली तस्वीरों को साझा करने के लिए कहा है। दूतावास और इसके भागीदार समुदायों की प्रतिक्रियाओं की सुंदरता और विविधता से अभिभूत हैं। हमारे लोगों के चेहरे सभी नस्ल और धार्मिक पृष्ठभूमि के अमेरिकियों और भारतीय लोगों को एक सूत्र में बांधने वाली विविधता का जीवंत चित्रण करते हैं।