भारत में अमेरिकी राजदूत – केनेथ आई. जस्टर

भारत में अमेरिकी राजदूत – केनेथ आई. जस्टर

केनेथ आई. जस्टर

केनेथ आई. जस्टर के नाम की अमेरिकी सीनेट द्वारा 2 नवंबर 2017 को सर्वसम्मति से पुष्टि की गई और राष्ट्रपति ने 3 नवंबर, 2017 को भारत में अमेरिका के 25 वें राजदूत के रूप में नियुक्त किया। उन्होंने 23 नवंबर, 2017 को भारत के राष्ट्रपति को अपना परिचय-पत्र प्रस्तुत किया। श्री जस्टर को सीनियर बिजनेस एक्जीक्यूटिव, सीनियर लॉ पार्टनर, और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के रूप में लगभग 40 वर्षों का अनुभव है।

श्री जस्टर ने जनवरी से जून 2017 तक इंटरनेशनल इकोनोमिक अफेयर्स प्रेसीडेंट के डिप्टी असिस्टेंट और नेशनल इकोनोमिक काउंसिल के डिप्टी डायरेक्टर के रूप में कार्य किया है। वह नेशनल सिक्यूरिटी काउंसिल स्टाफ और नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल स्टाफ, दोनों के वरिष्ठ सदस्य थे। अपनी इस भूमिका में उन्होंने प्रशासन की अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नीतियों को समन्वित किया और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के साथ जोड़ा। टाओरमीना, इटली में जी-7 सम्मेलन की तैयारी के दौर में उन्होंने प्रमुख अमेरिकी वार्ताकार (‘‘शेरपा”) के तौर पर कार्य किया है।

इससे पूर्व वह वैश्विक निवेश फर्म वारबर्ग पिनकस में 2010-2017 तक पार्टनर और प्रबंध निदेशक थे, जहां उन्होंने फर्म की निवेश गतिविधियों और पोर्टफोलियो कंपनियों से जुड़े भूराजनीतिक रिस्क, वैश्विक पब्लिक पॉलिसी और नियामक मुद्दों समेत बहुत तरह के मसलों पर अपना ध्यान केंद्रित किया। वह 2005-2010 तक व्यावसायिक उद्यमों के लिए क्लाउड कंप्यूटिंग के क्षेत्र की अग्रणी सॉ़फ्टवेयर कंपनी सेल्स़फोर्स डॉट कॉम में कानून, नीति और कारपोरेट रणनीति मामलों के कार्यकारी वाइस प्रज़िडेंट रहे।

उन्होंने 2001-2005 तक अमेरिका के वाणिज्य अंडर सेक्रेटरी के तौर पर अपनी सेवाएं दीं और उनके पास उद्योग एवं सुरक्षा ब्यूरो का प्रभार था। अपनी इस हैसियत में उन्होंने अमेरिका की सुरक्षा, बहिष्कार-विरोधी कानूनों पर अमल और अंतरराष्ट्रीय हथियार नियंत्रण समझौतों के इंडस्ट्री द्वारा पालन को प्रभावित करने वाले और रणनीतिक व्यापार नियंत्रण, आयात और विदेशी निवेश समेत व्यवसाय एवं राष्ट्रीय सुरक्षा में टकराव वाले मुद्दों पर निगाह रखी। वह अमेरिका-भारत उच्च प्रौद्योगिकी सहयोग समूह के सह-संस्थापक थे और इसके अमेरिकी प्रमुख भी रहे। वह अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक भागीदारी पहल के अगले चरणों के अहम वास्तुकार रहे। उस पहल ने दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक नागरिक परमाणु समझौते के लिए आधार बनाने में मदद की। वाणिज्य विभाग में अपना कार्यकाल पूरा होने पर उन्हें विलियम सी. रेड़फील्ड पुरस्कार मिला, जो इस विभाग में दिया जाने वाला सबसे बड़ा सम्मान है।

उन्होंने 1992-1993 के दौरान अमेरिकी विदेश विभाग के काउंसलर (कार्यवाहक) और 1989-1992 के दौरान डिप्टी सेक्रेटरी लॉरेंस एस. ईगलबर्गर के डिप्टी और वरिष्ठ सलाहकार के तौर पर अपनी सेवाएं दीं। मध्य एवं पूर्वी यूरोप और पूर्व सोवियत संघ के लिए क्षेत्र के शुरुआती उद्यम कोष की स्थापना समेत अमेरिकी सहायता कार्यक्रमों की संस्थापना और उनके प्रबंधन में शामिल अहम अधिकारियों में वह भी शामिल थे। वह डिप्टी सेक्रेटरी ईगलबर्गर के नेतृत्व में उन पांच लोगों के दल का हिस्सा थे जिसने पहले खाड़ी युद्ध से पूर्व और इसके दौरान युद्ध के वक्त इस्राइलियों से उनके रुझान को लेकर समन्वय के लिए इस्राइल का दौरा किया। विदेश विभाग में अपना कार्यकाल पूरा होने पर उन्हें विभाग का सबसे बड़ा सम्मान विशिष्ट सेवा पुरस्कार प्रदान किया गया।

उन्होंने 1981-1989 और 1993-2001 के दौरान अर्नोल्ड एंड पोर्टर लॉ फर्म में प्रैक्टिस की, जहां वह सीनियर पार्टनर बने। उनके कार्यों में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता एवं मुकदमे, कारपोरेट परामर्श, नियामक मसले और अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सौदे शामिल थे। उनके उल्लेखनीय मामलों में नोरिएगा शासन के विरुद्ध पनामा की निर्वासित सरकार का प्रतिनिधित्व करना शामिल है। इसके उपरान्त पनामा के राष्ट्रपति ने उन्हें वास्को नुनेज डे बालबोआ इन इल ग्रेडो डे ग्रान क्रूज़ डेकोरेशन एंड मेडल प्रदान किया।

उन्होंने 2010 में हार्वर्ड के केनेडी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में विजिटिंग फेलो के तौर पर और 2007-2010 के दौरान राष्ट्रपति की व्यापार नीति एवं व्यापार वार्ता से संबद्ध सलाहकार समिति के सदस्य के तौर पर अपनी सेवाएं दी। वर्ष 1993 में उन्होंने विदेश संबंध परिषद में विजिटिंग फेलो, 1980-1981 में यू. एस. कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द सेकेंड सर्किट के न्यायाधीश जेम्स एल. ओक्स के लॉ क्लर्क के तौर पर और 1978 में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में अपनी सेवाएं दीं। इसके अतिरिक्त वह हार्वर्ड के वेदरहेड सेंटर फॉर इंटरनेशनल अ़फेयर्स की परामर्श समिति के चेयरमैन, फ्रीडम हाउस के चेयरमैन और एशिया फाउंडेशन के वाइस-चेयरमैन भी रहे। इस समय वह विदेश संबंध परिषद और अमेरिकी राजनयिक एकेडेमी के सदस्य हैं।

उन्होंने हार्वर्ड लॉ स्कूल से लॉ की डिग्री, हार्वर्ड के जॉन एफ. केनेडी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट से पब्लिक पॉलिसी में मास्टर्स डिग्री और हार्वर्ड कॉलेज से शासन में बैचलर ऑफ आर्ट्स डिग्री (फाई बीटा कापा) ली है।