अमेरिकी रक्षा मंत्री के भारत दौरे पर भारत-अमेरिका का संयुक्त वक्तव्य (10-13 अप्रैल, 2016)

1.            अमेरिकी डिफेंस सेक्रेटरी डा. एश्टन कार्टर, रक्षा मंत्री श्री मनोहर पर्रिकर के निमंत्रण पर 10 से 13 अप्रैल, 2016 को भारत के दौरे पर हैं। रक्षा मंत्री ने सेक्रेटरी कार्टर का अतिथि सत्कार गोवा में किया। उन्होंने करवार में भारतीय नौसैनिक अड्डे और विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य का दौरा किया। उन्होंने यूएसएस ब्लू रिज़ को भी देखा जिसने सेक्रेटरी के दौरे के दौरान गोवा में पोर्ट काल आयोजित की। उसके बाद सेक्रेटरी कार्टर नई दिल्ली गए जहां उन्होंने रक्षा मंत्री के साथ आधिकारिक बातचीत आयोजित की, और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार तथा प्रधान मंत्री से भी मुलाकात करेंगे।

2.            अमेरिका और भारत के साझा हित वैश्विक शांति, समृद्धि, और स्थायित्व में हैं। भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक भागीदारी का मुख्य तत्व द्विपक्षीय रक्षा सहयोग है। सेक्रेटरी कार्टर का दौरा एक वर्ष के अंदर उनके और रक्षा मंत्री के बीच चौथी मीटिंग है, यह मजबूत और गहरे द्विपक्षीय रक्षा संबंधों के नियमित मंत्रिस्तरीय जिम्मेदारी को प्रदर्शित करता है।

3.            अपनी मीटिंग के दौरान रक्षा मंत्री पर्रिकर और सेक्रेटरी कार्टर ने पिछले जून में अमेरिका-भारत रक्षा संबंधों के लिए नए फ्रेमवर्क पर हस्तक्षर करने के बाद से द्विपक्षीय रक्षा संबंधें को मजबूत बनाने के लिए उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों की समीक्षा की। उन्होंने आने वाले वर्षों में रक्षा संबंधों में प्राथमिकताओं के बारे में बातचीत की, इसके साथ-साथ इन प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए दोनों पक्ष विशेष कदम उठाएंगे। इसमें डिफेंस टेक्नोलॉजी एंड ट्रेड इनीशिएटिव (डीटीटीआई) के अंतर्गत सहयोग का विस्तार करना; भारत के मेक इन इंडिया प्रयास; समुद्री सुरक्षा मारीटाइम डोमेन अवेयरनैस के लिए सहयोग को गहरा बनाना; दोनों देशों के सैनिकों के बीच रिश्ते; रक्षा के क्षेत्र में ज्ञान भागीदारी; तथा परस्पर हित के क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में सहयोग का विस्तार करना शामिल है।

4.            रक्षा मंत्री पर्रिकर और सेक्रेटरी कार्टर ने भारतीय और अमेरिकी सशस्त्र सेनाओं द्वारा आने वाले वर्षों में सहयोग का और विस्तार करने के प्रयासों का स्वागत किया है। उन्होंने सैनिकों की अधिक जटिल सेवाओं उनके कार्यक्रम और अभ्यास योजनाओं का स्वागत किया, इनमें अधिक आधुनिक समुद्री अभ्यास को विकसित करना शामिल है। दोनों पक्षों ने रिम-ऑफ-द-सैसिफिक (आरआईएमपीएसी) बहुपक्षीय नौसिक अभ्यास 2016 में भारत की भागीदारी को स्वीकार कर लिया है। इसके साथ-साथ अलास्का में अप्रैल-मई 2016 में बहुपक्षीय रेड फ्लैग अभ्यास में भारतीय वायुसेना की भागीदारी तथा फरवरी 2016 में विशाखापटनम में भारतीय नौसेना के इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में अमेरिकी भागीदारी को स्वीकार किया है। उन्होंने व्यवहारिक रूप से द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने में मददगार समझौतों तैयार करने की इच्छा व्यक्त की है। इस संबंध में उन्होंने लॉजिस्टिक एक्सचेंज मेमोरेंडम आफ एग्रीमेंट के लिए सैद्धांतिक समझौते की घोषणा की। और सैनिक सहयोग तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण बढ़ाने के लिए दूसरे समझौतों के लिए कार्य जारी रखने की घोषणा की।

5.            मैं एशिया प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्र तथा समुद्री सुरक्षा के लिए भारत अमेरिका संयुक्त रणनीतिक विजन के समर्थन में दोनों पक्ष समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए सहमत हुए। इस संदर्भ में उन्होंने वाणिज्यिक शिपिंग ट्रैफिक पर डाटा साझा करने में सुधार करने के लिए एक ‘‘व्हाइट शिपिंग’’ तकनीकी व्यवस्था करने के लिए तेजी लाने की भी पुष्टि की। वे पनडुब्बी सुरक्षा और पनडुब्बी रोधी युद्ध पर दोनों देशों के नौसैनिकों में बातचीत आरंभ करने के लिए सहमत हुए। दोनों एक द्विपक्षीय मारीटाइम सिक्यूरिटी डायलॉग शुय करने पर भी सहमत हुए, जिसके सहअध्यक्ष भारतीय रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय तथा अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस और स्टेट के संयुक्त सचिव/असिस्टेंट सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी होंगे।

6.            सेक्रेटरी कार्टर और रक्षा मंत्री पर्रिकर ने समुद्री सुरक्षा रक्षण और नौपरिवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने तथा पूरे क्षेत्र में उड़ान भरने की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने के महत्व को दोहराया। उन्होंने एशिया-प्रशांत और हिंद महासागर में शांति और खुशहाली के लिए अनुकूल एक कानूनी प्रणाली और क्षेत्रीय सुरक्षा के ढांचे में मदद की सहायता के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया और दशकों से एशिया प्रशांत के लिए लाभकारी सुरक्षा और स्थायित्व को सुनिश्चित करने के लिए मिलकर और दूसरे देशों के साथ कार्य करने प्रतिबद्धता पर बल दिया।

7.            रक्षा मंत्री पर्रिकर और सेक्रेटरी कार्टर ने डीटीटीआई के अंतर्गत उच्च रक्षा सामग्री की साथ मिलकर विकास और उत्पादन करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और इस संबंध में होने वाली गतिविधियों का जायजा लिया। इस विषय में उन्होंने डिज़िटल हैलमेट माउंटेड डिस्प्लेज और ज्वाइंट बायोलॉजिकल डिटेक्शन सिस्टम पर दो नए डीटीटीआई अग्रणी परियोजनाओं को शुरू करने पर सहमत हुए। उन्होंने जेट इंजिन प्रौद्योगिकी ज्वाइंट वर्किंग गु्रप (जेईटी जेडब्ल्यूजी) तथा एयरक्राफ्ट कैरियर टेक्नोलॉजी कोआपरेशन पर ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप में जारी बातचीत की सराहना की। उन्होंने एयरक्राफ्ट कैरियर के डिजाइन और ऑपरेशन तथा जेट इंजिन टेक्नोलॉजी पर गहन विचार-विमर्श करने सहित आधुनिक डिफेंस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अधिक से अधिक सहयोग के लिए काम करने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने एयरक्राफ्ट कैरियर के लिए विशिष्ट डेटा और जानकारी में सहयोग बढ़ाने के लिए एक इन्फॉर्मेशन एक्सचेंज एनेक्सी (आईईए) पर बातचीत की।

8.            भारत सरकार के मेक इन इंडिया प्रोग्राम में अमेरिकी रक्षा उद्योग की अधिक से अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रक्षा मंत्री पर्रिकर ने सेक्रेटरी कार्टर को भारतीय रक्षा विभाग में हाल ही में तैयार की गई डिफेंस प्रोक्योरमेंट पॉलिसी और अन्य सुधारों के बारे में बताया। दोनों पक्षों ने आधुनिक परियोजनाओं की एक श्रृंखला की प्राप्ति में नई भागीदारियों को विकसित करने के लिए अपने-अपने देशों के रक्षा उद्योगों को प्रोत्साहित करने पर सहमति व्यक्त की। अमेरिका ने मेक इन इंडिया की सहायता हेतु भारत के लिए उपयुक्त युद्धक जहाज बनाने में मदद के लिए दो प्रस्तावों को भारत सरकार के विचार-विमर्श हेतु पेश किया।

9.            सेक्रेटरी कार्टर और रक्षा मंत्री पर्रिकर ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग के क्षेत्र की चार योजनाओं — हाई एनर्जी लेजर्स के लिए एटमॉस्फेरिक साइंसेज, कोग्नेटिक टूल्स फॉर टारगेट डिटेक्शन, पायलट रहित इंटेलीजेंट एरियल सिस्टम और ब्लास्ट एंड ब्लंट ट्रॉमैटिक ब्रेन इंजुरी– के पूर्ण होने का स्वागत किया।

10.          भारत से प्रस्थान करने से पूर्व सेक्रेटरी कार्टर अमेरिकी विश्वयुद्ध द्वितीय के अवशेषों की भारत से अमेरिका वापसी के एक समारोह में सम्मिलित होंगे। सेक्रेटरी कार्टर ने अवशेष की तलाश के प्रयत्नों में सुविधा पहुंचाने के लिए रक्षा मंत्री पर्रिकर पर भारत सरकार का धन्यवाद किया। भारत सरकार ने अमेरिका के अपने मृत अधिकारियों को देश वापस लाने और उनके परिवारों को उनकी पूर्ण संभव लेखा-जोखा देने की प्रतिबद्धता में मदद करने पर सहमति व्यक्त की, और आगले चंद वर्ष में इन अमेरिकी हीरोज के अवशेष उनके परिवारों को लौटाने के इस प्रकार के मानवीय अभियानों को आगे बढ़ाने की राह देख रही है।