हैदराबाद पुरस्कार समारोह में कॉर्पोरेट और मीडिया क्षेत्र के टीबी चैंपियंस को सम्मानित किया गया

हैदराबाद में फेफड़े के स्वास्थ्य पर 50वें केंद्रीय विश्व सम्मेलन के मौके पर आज, अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय विकास एजेंसी (यूएसएआईडी), रिसोर्स ग्रुप फॉर एजुकेशन एंड एडवोकेसी फॉर कम्युनिटी हेल्थ (REACH) और स्टॉप टीबी पार्टनरशिप ने टीबी समाप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले निगमों और पत्रकारों को सम्मानित किया।

यह कार्यक्रम बृहनमुंबई विद्युत आपूर्ति और परिवहन, बेक्टन डिकिंसन एंड कंपनी, गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड और मेदांता की प्रशंसा प्रमाण पत्र की प्रस्तुति के साथ शुरू किया गया। जिन्होंने टीबी के खिलाफ भारत की लड़ाई में अनुकरणीय नेतृत्व का प्रदर्शन किया है। इन चारों ने संयुक्त राज्य अमेरिका में “कॉर्पोरेट टीबी प्लीज़” के समर्थन में हस्ताक्षर किए हैं, जो कंपनियों को टीबी से निपटने के लिए अपने संसाधनों को समर्पित करने के लिए प्रोत्साहित करता है, टीबी के बारे में साध्य रोग के रूप में जागरूकता पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, और अंततः टीबी के स्वास्थ्य परिणामों में सुधार करते हैं।

इस कार्यक्रम में बोलते हुए, हैदराबाद में संयुक्त राज्य अमेरिका के महावाणिज्यदूत श्री जोएल रिफमैन ने कहा कि स्वस्थ, टीबी मुक्त भारत सुनिश्चित करने में भारतीय कंपनियों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। “संपूर्ण भारत में कंपनियां ऐसे अभिनव समाधान ढूंढ रही हैं जो उनके कार्यबल और समुदायों की मदद कर रहे हैं जिसमें वे इस जानलेवा लेकिन उपचार योग्य बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए काम करते हैं; टीबी के कलंक के विरुद्ध संघर्ष करें; लोगों को जांच के लिए प्रोत्साहित करें; जांच में टीबी संक्रमित पाए जाने वाले लोगों का सहयोग करें; और उन्हें उपचार जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करें।”

इस कार्यक्रम में चार पत्रकारों को टीबी के बारे उत्कृष्ट और जिम्मेदार रिपोर्टिंग के लिए सम्मानित किया गया। 2010 से प्रतिवर्ष दिया जाने वाला रीच मीडिया अवार्ड्स, टीबी की रोकथाम और देखभाल के बारे में जनता और निर्णयकर्ताओं को सूचित करने में मीडिया द्वारा निभाई जाने वाली महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हैं। इस कार्यक्रम में बोलते हुए, यूएसएआईडी मिशन के निदेशक कीथ सिमंस ने कहा, “सटीक, संवेदनशील, प्रभावी और यथासमय पत्रकारिता टीबी की सार्वजनिक समझ में सुधार कर सकती है, टीबी सेवाओं की सुगमता में वृद्धि कर सकती है, और बीमारी के बारे में बहुत से मिथकों और भ्रांतियों को दूर कर सकती है।”

अंग्रेजी भाषा की श्रेणी में, दिल्ली की स्वतंत्र पत्रकार मेनका राव को उनके धारावाहिक केरलाज टीबी रिस्पांस इन इंडियास्पेंड के लिए इसके साथ-साथ द हिन्दू बिजनेसलाइन की मैत्री पोरचा को टीबी से प्रभावित लोगों के लिए नई दवाओं के रोलआउट पर उनकी कहानी के लिए सम्मानित किया गया।

स्थानीय भाषा श्रेणी में, विजेता भोपाल के प्रशांत कुमार दुबे थे, जो टीबी से जुड़े कलंक पर उनकी कहानी ‘‘डाउन टू अर्थ’’ (हिंदी) में प्रकाशित हुई थी, और केरल स्थित रिचर्ड जोसेफ, जिनकी ’’टीबी का संभावित उन्मूलन’’ नामक कहानी राष्ट्र दीपिका में प्रकाशित हुई थी।

इस वर्ष, पूरे भारत में 40 से अधिक प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं। सभी प्रविष्टियों का मूल्यांकन एक प्रतिष्ठित जूरी (न्यायिक समिति) द्वारा किया गया, जिसमें पुरस्कार विजेता, सुश्री सुतापा देब, टेलीविजन पत्रकार; सुश्री ब्लेसिना कुमार, सीईओ, ग्लोबल कोलीशन ऑफ टीबी एक्टीविस्ट्स; सुश्री प्रभा महेश, टीबी एडवोकेट और सलाहकार बोर्ड सदस्य, टीबी से प्रभावित हुई थीं; श्री सुब्रत मोहंती, तपेदिक और फेफड़ों के रोग के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय संघ; सुश्री शोभा शुक्ला, कार्यकारी निदेशक और प्रबंध संपादक, नागरिक समाचार सेवा; और डॉ सुंदरी मैसे, पहले डब्ल्यूएचओ में कार्यरत शामिल थे।

रीच की कार्यकारी निदेशक, डॉ. राम्या अनंतकृष्णन ने कार्यक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा, “भारत में हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक यह सुनिश्चित करना है कि लोगों को टीबी लक्षणों की जानकारी है, कहां इलाज के लिए जाया जाए और यह एक साध्य रोग है। प्रशिक्षित पत्रकारों द्वारा उच्च-गुणवत्ता की रिपोर्टिंग इस सूचना की खाई को पाट सकती है, टीबी से जुड़े कलंक को दूर कर सकती है और जीवन की रक्षा कर सकती है ”।